सीवान गोलीकांड: बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब, क्या है सरकार की दलील
बिहार में हाल ही में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग को लेकर उठे सवालों के जवाब में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने पुलिस पर लगे अनुपातहीन बल प्रयोग के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाओं के बाद पुलिस को स्थिति संभालने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस पूरे प्रकरण में सबसे चर्चित घटना रही सीवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा से फायरिंग की घटना। सरकार ने इस मामले में स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि भीड़ में फंस जाने के बाद एक कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में चार गोलियां चलाई थीं। सरकार का दावा है कि इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंची। हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि प्लाटून स्तर के हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए था।
राज्य सरकार ने बताया कि इस घटना के बाद संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके अलावा, पुलिस महानिदेशक ने पूरे राज्य में के इस्तेमाल पर रोक संबंधी निर्देश भी जारी किए हैं। सरकार ने यह भी बताया कि घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिसमें हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
इस पूरे प्रकरण ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे के माध्यम से सरकार ने अपने पक्ष को रखने का प्रयास किया है, जबकि विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
सरकार का पक्ष: पुलिस ने किया जरूरी बल प्रयोग
बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच राज्य भर में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार ने बताया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद पुलिस को स्थिति संभालने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सरकार ने बताया कि सीवान के गांधी मैदान में जुटे प्रदर्शनकारी चौक की ओर मार्च करने लगे थे। दोपहर के समय प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड की तरफ से आए उपद्रवी भी पत्थरबाजी में शामिल हो गए, जिससे स्थिति और विकट हो गई।
हलफनामे में बताया गया कि पथराव की घटना में सीवान के पुलिस अधीक्षक समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें 2 एसडीपीओ, 2 इंस्पेक्टर, 2 सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल शामिल थे। इसके अलावा, पुलिस की 2 गाड़ियों और बड़ी संख्या में ट्रैफिक ट्रॉलियों को भी नुकसान पहुंचा। सरकार ने दावा किया कि पूरे प्रदर्शन के दौरान कुल 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए।
- पत्थरबाजी और हिंसा:प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद पुलिस को स्थिति संभालने के लिए मजबूर होना पड़ा।
- पुलिस कर्मियों की चोटें:पथराव में 20 पुलिसकर्मी घायल हुए, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
- संपत्ति को नुकसान:पुलिस की 2 गाड़ियों और ट्रैफिक ट्रॉलियों को नुकसान पहुंचा।
- कुल घायल:पूरे प्रदर्शन के दौरान 157 पुलिसकर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए।
फायरिंग घटना: सरकार का स्पष्टीकरण
सीवान में हुई फायरिंग की घटना ने पूरे मामले को और विवादास्पद बना दिया। सरकार ने इस घटना पर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि भीड़ में फंस जाने के बाद एक कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में चार गोलियां चलाई थीं। सरकार का दावा है कि इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंची।
सरकार ने बताया कि एक प्लाटून स्तर का हथियार है, जिसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए किया जाता है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए था। इस घटना के बाद संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इसके अलावा, पुलिस महानिदेशक ने पूरे राज्य में के इस्तेमाल पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने बताया कि घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिसमें हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि एक एएसआई ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अपनी 9 पिस्टल से 2 राउंड फायर किए। इस दौरान 3 प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं। सरकार के मुताबिक, इन प्रदर्शनकारियों को से गोली नहीं लगी थी और वे उस जगह पर भी मौजूद नहीं थे जहां से फायरिंग हुई थी।
- आत्मरक्षा में फायरिंग:भीड़ में फंस जाने के बाद कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में चार गोलियां चलाईं।
- कोई चोट नहीं:सरकार का दावा है कि गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंची।
- हथियार का प्रकार:प्लाटून स्तर का हथियार है, जिसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए किया जाता है।
- निलंबन और कार्रवाई:संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
- बैलिस्टिक जांच:घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है, जिसमें हथियार के प्रकार, गोली चलने की दूरी और फायरिंग के कोण जैसी जानकारियां जुटाई जा रही हैं।
पुलिस बल द्वारा उठाए गए कदम: वाटर कैनन और आंसू गैस
सरकार ने अपने हलफनामे में बताया कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए अलग-अलग विभागों और पुलिस लाइनों में तैनात अधिकारियों एवं जवानों को भी मौके पर बुलाया गया।
सरकार ने बताया कि हिंसा से जुड़े मामलों में कुल 82 लोगों के खिलाफ छह दर्ज की गई हैं। इनमें से 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने मामले की जांच जारी रहने की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी है।
सरकार ने बताया कि 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में 69 दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के जरिए छोड़ा गया।
सरकार ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे सभी बच्चों को, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, साधारण बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है। पुलिस का दावा है कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही है।
- वाटर कैनन और आंसू गैस:हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया।
- अधिकारियों की तैनाती:कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए अलग-अलग विभागों और पुलिस लाइनों में तैनात अधिकारियों एवं जवानों को मौके पर बुलाया गया।
- और गिरफ्तारियां:हिंसा से जुड़े मामलों में कुल 82 लोगों के खिलाफ छह दर्ज की गईं, जिनमें से 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- कुल गिरफ्तारियां:22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में 69 दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
- जमानत और रिहाई:बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड के जरिए छोड़ा गया।
डेटा सुरक्षा और प्रदर्शनकारियों की पहचान: सरकार का रुख
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक को दिए हैं। सरकार ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को फिलहाल सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है।
सरकार का कहना है कि छात्रों समेत प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है। सरकार ने बताया कि पुलिस द्वारा एकत्रित किए गए डेटा का इस्तेमाल केवल कानूनी कार्रवाई के लिए किया जाएगा।
- वीडियो फुटेज और रिकॉर्ड:सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
- डेटा सुरक्षा:प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है।
- पहचान सुरक्षा:सरकार ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है।
सीवान गोलीकांड: पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई घटनाओं की तुलना
| मुद्दा | पुलिस बल का पक्ष | प्रदर्शनकारियों का पक्ष |
|---|---|---|
| बल प्रयोग | पुलिस ने पत्थरबाजी और हिंसा के जवाब में जरूरी बल प्रयोग किया। | प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने अनुपातहीन बल का इस्तेमाल किया। |
| फायरिंग | भीड़ में फंस जाने के बाद कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में चार गोलियां चलाईं। | प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने से गोलियां चलाईं, जिससे कई लोग घायल हुए। |
| घायल | पुलिस के 157 कर्मी और 7 सरकारी कर्मचारी घायल हुए। | प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई प्रदर्शनकारी पुलिस की गोलीबारी से घायल हुए। |
| गिरफ्तारियां | कुल 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 17 को में नामित किया गया। | प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निर्दोष छात्रों को गिरफ्तार किया गया। |
| डेटा सुरक्षा | सरकार ने प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का निर्देश दिया। | प्रदर्शनकारियों को डर है कि उनका डेटा सार्वजनिक किया जा सकता है। |
प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए आरोपों पर सरकार का जवाब
प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों द्वारा पुलिस पर लगे आरोपों के जवाब में सरकार ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया है कि पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए। सरकार ने बताया कि पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाओं के बाद पुलिस को स्थिति संभालने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सरकार ने बताया कि फायरिंग की घटना में भी भीड़ में फंस जाने के बाद कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में गोलियां चलाई थीं। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि प्लाटून स्तर के हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए था।
सरकार ने बताया कि पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप स्थिति को नियंत्रित किया जा सका। सरकार ने कहा कि पुलिस बल ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया।
क्या कहती हैं विपक्षी पार्टियां
विपक्षी दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा छात्रों पर से गोलियां चलाई गईं। तेजस्वी यादव ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर सरकार ने इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।
विपक्षी दलों का आरोप है कि पुलिस ने अनुपातहीन बल का इस्तेमाल किया और निर्दोष छात्रों को निशाना बनाया। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
क्या है कानूनी प्रक्रिया आगे
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि घटना की बैलिस्टिक जांच जारी है। सरकार ने कहा है कि पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने बताया कि पुलिस महानिदेशक ने पूरे राज्य में के इस्तेमाल पर रोक संबंधी निर्देश जारी किए हैं।
सरकार ने कहा है कि पुलिस द्वारा एकत्रित किए गए सबूतों और वीडियो फुटेज का इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई के लिए किया जाएगा। सरकार ने बताया कि पुलिस बल द्वारा उठाए गए कदमों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी।
सीवान गोलीकांड: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1 सीवान गोलीकांड क्या हुआ था
22 से 25 जुलाई 2026 के बीच बिहार में छात्र प्रदर्शनों के दौरान सीवान में पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की घटना को सीवान गोलीकांड कहा जा रहा है। इस दौरान पुलिस द्वारा पत्थरबाजी और हिंसा के जवाब में बल प्रयोग किया गया, जिसमें एक कांस्टेबल द्वारा से फायरिंग भी शामिल थी।
2 सरकार ने अपने हलफनामे में क्या कहा है
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में पुलिस पर लगे अनुपातहीन बल प्रयोग के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सरकार ने कहा है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कदम उठाए। सरकार ने बताया कि भीड़ में फंस जाने के बाद एक कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में चार गोलियां चलाई थीं, जिनसे किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंची।
3 फायरिंग की घटना में क्या हुआ था
सीवान में हुई फायरिंग की घटना में एक कांस्टेबल ने भीड़ में फंस जाने के बाद आत्मरक्षा में हवा में चार गोलियां चलाई थीं। सरकार का दावा है कि इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी को चोट नहीं पहुंची। हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि प्लाटून स्तर के हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए था।
4 पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों में क्या शामिल था
पुलिस द्वारा हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, कानून-व्यवस्था की स्थिति को संभालने के लिए अलग-अलग विभागों और पुलिस लाइनों में तैनात अधिकारियों एवं जवानों को भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामलों में कुल 82 लोगों के खिलाफ छह दर्ज की हैं, जिनमें से 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
5 सरकार ने प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी को लेकर क्या कहा है
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सभी वीडियो फुटेज और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान जुटाई गई प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा को सार्वजनिक या सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी प्रकाशित नहीं की जा रही है।
निष्कर्ष
सीवान गोलीकांड की घटना ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष को रखते हुए पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों को जरूरी बताया है। सरकार ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया, जबकि विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने अनुपातहीन बल का इस्तेमाल किया।
फायरिंग की घटना ने पूरे मामले को और विवादास्पद बना दिया है। सरकार ने इस घटना पर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि भीड़ में फंस जाने के बाद कांस्टेबल ने आत्मरक्षा में हवा में गोलियां चलाई थीं। हालांकि, सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि प्लाटून स्तर के हथियार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं किया जाना चाहिए था।
सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्वरूप स्थिति को नियंत्रित किया जा सका, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पुलिस द्वारा उठाए गए कदम जरूरी थे क्या जैसे हथियारों का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाना चाहिए क्या प्रदर्शनकारियों की पहचान संबंधी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए
इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे, जब पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की स्वतंत्र जांच पूरी होगी और सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों का विश्लेषण किया जाएगा। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि इस घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था और पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर से बहस छेड़ दी है।
