पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का नया अध्याय: सीएम शुभेंदु अधिकारी के निजी सहयोगी की हत्या के मामले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हिंसा और साजिश के गंभीर आरोप सामने आए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों को शामिल किया गया है, जिनमें से दो व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं।
छह मई, 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के दो दिन बाद मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया था। पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने राज्य पुलिस से इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। अब सीबीआई की चार्जशीट में राजनीतिक साजिश के तार उजागर हुए हैं, जिनसे इस हत्या के पीछे की सच्चाई सामने आ रही है।
इस मामले में सीबीआई की जांच में यह सामने आया है कि रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। हालांकि, किसी कारणवश इस सुपारी हत्या को अंजाम देने की तारीख बार-बार बदलती रही। सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि इस मामले में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
इस पूरे प्रकरण ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या राज्य में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हिंसा का रूप ले रही है? क्या यह मामला केवल व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र है? इन सवालों के जवाब अब सीबीआई की चार्जशीट और आगे की जांच में मिल सकते हैं।
मामले की शुरुआत: चुनाव परिणाम के बाद हुई हत्या
छह मई, 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित हुए थे। दो दिन बाद, आठ मई, 2026 को मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहयोगी थे और भवानीपुर सीट से अधिकारी के चुनाव प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभा रहे थे।
इस हत्या ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी थी। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई से जांच की मांग की थी। जिसके बाद सीबीआई ने राज्य पुलिस से मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। हालांकि, किसी कारणवश इस हत्या को अंजाम देने की तारीख बार-बार बदलती रही। अंततः आठ मई, 2026 को इस हत्या को अंजाम दिया गया।
सीबीआई की चार्जशीट: 11 आरोपियों में 2 बीजेपी कार्यकर्ता
सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करते हुए कुल 11 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें से दो व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। सीबीआई ने हाल ही में रथ के कार्यालय में काम करने वाले बीजेपी कार्यकर्ता सागर सोनकर और उसके भाई साहिब सोनकर को गिरफ्तार किया था।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि सागर सोनकर और साहिब सोनकर पर रथ की हत्या की सुपारी उत्तर प्रदेश के शूटर्स को देने का आरोप है। इसके अलावा, सीबीआई को जानकारी मिली है कि बीजेपी में शामिल होने से पहले 2020 तक सागर सोनकर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के विधायक के साथ काम करता था।
इस मामले में सीबीआई ने छह शूटरों को गिरफ्तार किया है, जिनके नाम हैं: मोनू सिंह, राज सिंह, गोलू सिंह, मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और नवीन कुमार सिंह। इसके अलावा, सुपारी लेने वाले बिचौलियों विनय राय, संजय राय और विकास मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि एक आरोपी अभी भी फरार है।
राजनीतिक साजिश के तार: प्रतिद्वंद्वी पार्टी के पदाधिकारी की भूमिका
सीबीआई की चार्जशीट में राजनीतिक साजिश के तार उजागर हुए हैं। अधिकारियों ने बताया है कि राज्य में एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, सीबीआई ने अभी तक इस पदाधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि जांच में सामने आया है कि भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी के चुनाव प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। इस योजना में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भूमिका भी शामिल थी।
इस मामले में सीबीआई की जांच से यह भी सामने आया है कि बीजेपी में शामिल होने से पहले सागर सोनकर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के विधायक के साथ काम करता था। इससे यह सवाल उठता है कि क्या इस हत्या के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी या फिर व्यक्तिगत द्वेष।
सीबीआई की जांच: सुपारी हत्या की योजना और उसके पीछे के कारण
सीबीआई की जांच में यह सामने आया है कि रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। हालांकि, किसी कारणवश इस हत्या को अंजाम देने की तारीख बार-बार बदलती रही। अंततः आठ मई, 2026 को इस हत्या को अंजाम दिया गया।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि इस मामले में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उन्होंने बताया है कि इस हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश के तार उजागर हुए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं है।
सीबीआई ने अब तक छह शूटरों और तीन बिचौलियों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपी अभी भी फरार है। सीबीआई की जांच अभी भी जारी है और जल्द ही और आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सकता है।
चार्जशीट में शामिल आरोपी: कौन हैं 11 लोग?
- सागर सोनकरऔरसाहिब सोनकर: दोनों भाई हैं और बीजेपी के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। सीबीआई ने इन दोनों पर रथ की हत्या की सुपारी उत्तर प्रदेश के शूटर्स को देने का आरोप लगाया है।
- मोनू सिंह, राज सिंह, गोलू सिंह, मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य, नवीन कुमार सिंह: ये छह शूटर हैं, जिन्होंने रथ की हत्या को अंजाम दिया।
- विनय राय, संजय राय, विकास मिश्रा: ये तीन बिचौलिये हैं, जिन्होंने सुपारी लेने और शूटर्स तक पहुंचाने का काम किया।
- एक फरार आरोपी: सीबीआई ने एक आरोपी के फरार होने की जानकारी दी है, जिनकी तलाश जारी है।
राजनीतिक साजिश के सबूत: क्या है पूरा मामला?
सीबीआई की चार्जशीट में राजनीतिक कनेक्शन
सीबीआई की चार्जशीट में राजनीतिक साजिश के तार उजागर हुए हैं। अधिकारियों ने बताया है कि राज्य में एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, सीबीआई ने अभी तक इस पदाधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि जांच में सामने आया है कि भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी के चुनाव प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। इस योजना में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भूमिका भी शामिल थी।
इस मामले में सीबीआई की जांच से यह भी सामने आया है कि बीजेपी में शामिल होने से पहले सागर सोनकर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के विधायक के साथ काम करता था। इससे यह सवाल उठता है कि क्या इस हत्या के पीछे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता थी या फिर व्यक्तिगत द्वेष।
प्रतिद्वंद्वी पार्टी के पदाधिकारी की भूमिका
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि राज्य में एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, सीबीआई ने अभी तक इस पदाधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
इस मामले में सीबीआई की जांच से यह सामने आया है कि भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी के चुनाव प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। इस योजना में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भूमिका भी शामिल थी।
इस मामले में सीबीआई की चार्जशीट में राजनीतिक साजिश के तार उजागर हुए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं है।
सीबीआई की जांच प्रक्रिया: कैसे हुई मामले की पड़ताल?
राज्य पुलिस से सीबीआई को मिली जांच
पश्चिम बंगाल सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई से जांच की मांग की थी। जिसके बाद सीबीआई ने राज्य पुलिस से मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। हालांकि, किसी कारणवश इस हत्या को अंजाम देने की तारीख बार-बार बदलती रही। अंततः आठ मई, 2026 को इस हत्या को अंजाम दिया गया।
गिरफ्तार किए गए आरोपी और उनकी भूमिका
सीबीआई ने अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक आरोपी अभी भी फरार है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सागर सोनकर, साहिब सोनकर, छह शूटर और तीन बिचौलिये शामिल हैं।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि सागर सोनकर और साहिब सोनकर पर रथ की हत्या की सुपारी उत्तर प्रदेश के शूटर्स को देने का आरोप है। इसके अलावा, सीबीआई को जानकारी मिली है कि बीजेपी में शामिल होने से पहले 2020 तक सागर सोनकर प्रतिद्वंद्वी पार्टी के विधायक के साथ काम करता था।
इस मामले में सीबीआई ने छह शूटरों को गिरफ्तार किया है, जिनके नाम हैं: मोनू सिंह, राज सिंह, गोलू सिंह, मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और नवीन कुमार सिंह। इसके अलावा, सुपारी लेने वाले बिचौलियों विनय राय, संजय राय और विकास मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया है।
सीबीआई की चार्जशीट: क्या हैं मुख्य आरोप?
सीबीआई की चार्जशीट में मुख्य आरोप यह है कि रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी। हालांकि, किसी कारणवश इस हत्या को अंजाम देने की तारीख बार-बार बदलती रही। अंततः आठ मई, 2026 को इस हत्या को अंजाम दिया गया।
सीबीआई के अधिकारियों ने बताया है कि इस मामले में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उन्होंने बताया है कि इस हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश के तार उजागर हुए हैं, जिनसे यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं है।
तुलनात्मक विश्लेषण: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के मामले
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
| मामला | वर्ष | पीड़ित | आरोपी | राजनीतिक संबंध | स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|
| चंद्रनाथ रथ हत्या मामला | 2026 | मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहयोगी | 11 आरोपी (2 बीजेपी कार्यकर्ता) | राजनीतिक साजिश के तार | सीबीआई चार्जशीट दाखिल |
| जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा हमला | 2026 | मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के आवास की रेकी | हमिम मंडल (जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा) | आतंकवाद | गिरफ्तार |
| विधायक की हत्या मामला | 2025 | एक विधायक | अज्ञात | राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता | अनुसंधानाधीन |
| पुलिस अधिकारी की हत्या मामला | 2024 | एक पुलिस अधिकारी | अज्ञात | व्यक्तिगत द्वेष | अनुसंधानाधीन |
| राज्यपाल के सुरक्षा कर्मी पर हमला | 2023 | राज्यपाल के सुरक्षा कर्मी | अज्ञात | राजनीतिक कारण | अनुसंधानाधीन |
1. चंद्रनाथ रथ कौन थे और उनकी क्या भूमिका थी?
चंद्रनाथ रथ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहयोगी थे। वे भवानीपुर सीट से अधिकारी के चुनाव प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभा रहे थे।
2. चंद्रनाथ रथ की हत्या कब और कहां हुई?
चंद्रनाथ रथ की हत्या छह मई, 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के दो दिन बाद मध्यग्राम में गोली मारकर की गई थी।
3. सीबीआई ने चार्जशीट में कितने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है?
सीबीआई ने चार्जशीट में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें से दो व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं।
4. क्या इस हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश थी?
सीबीआई की चार्जशीट में राजनीतिक साजिश के तार उजागर हुए हैं। अधिकारियों ने बताया है कि राज्य में एक अन्य राजनीतिक दल के पदाधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। हालांकि, सीबीआई ने अभी तक इस पदाधिकारी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
5. क्या सीबीआई ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है?
सीबीआई ने अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक आरोपी अभी भी फरार है।
निष्कर्ष
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में सीबीआई की चार्जशीट ने राजनीतिक साजिश के तार उजागर कर दिए हैं। इस मामले में कुल 11 आरोपियों को शामिल किया गया है, जिनमें से दो व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं।
सीबीआई की चार्जशीट में यह सामने आया है कि रथ की हत्या की योजना दिसंबर 2025 से ही बन रही थी, लेकिन किसी कारणवश इस हत्या को अंजाम देने की तारीख बार-बार बदलती रही। अंततः आठ मई, 2026 को इस हत्या को अंजाम दिया गया।
इस मामले में राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सीबीआई की जांच से यह स्पष्ट होता है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक साजिश के तार भी उजागर हुए हैं।
सीबीआई ने अब तक कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक आरोपी अभी भी फरार है। इस मामले की आगे की जांच से और भी कई रहस्य सामने आ सकते हैं, जो पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा और साजिश के नए आयामों को उजागर करेंगे।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या राज्य में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हिंसा का रूप ले रही है? क्या यह मामला केवल व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र है? इन सवालों के जवाब अब सीबीआई की चार्जशीट और आगे की जांच में मिल सकते हैं।
