भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय शिखर सम्मेलन 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच गया है। 12 सितंबर को शुरू हुए इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन में के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों ने वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की। यह शिखर सम्मेलन, जो भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है, वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में समूह की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। सम्मेलन के समापन पर, सदस्य देशों द्वारा एक साझा दृष्टिकोण और प्रतिबद्धताओं को दर्शाने वाला नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया जाएगा, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में समूह के सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित करेगा।
भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी इस प्रतिष्ठित समूह की अध्यक्षता कर चुका है। इस वर्ष की अध्यक्षता के लिए भारत ने मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण ( , , ) की थीम निर्धारित की है, जिसमें मानवता पहले के सिद्धांत के साथ लोगों को केंद्र में रखने पर विशेष जोर दिया गया है। यह थीम वैश्विक चुनौतियों के लिए एक व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग और नवाचार के माध्यम से टिकाऊ भविष्य के निर्माण पर बल दिया गया है।
शिखर सम्मेलन का अंतिम दिन, यानी 13 सितंबर, कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और द्विपक्षीय वार्ताओं का गवाह बनेगा। सुबह के सत्र में नेताओं की आधिकारिक फैमिली फोटो के बाद मुख्य ओपन सेशन का आयोजन होगा, जिसका विषय मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के जरिए समावेशी वैश्विक विकास का भविष्य तैयार करना है। इस सत्र में सदस्य देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे, जो भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
शिखर सम्मेलन 2026: अंतिम दिन का विस्तृत कार्यक्रम
नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन 2026 का अंतिम दिन, 13 सितंबर, कई महत्वपूर्ण आयोजनों से भरा है, जो समूह के सदस्य देशों और आमंत्रित भागीदारों के बीच गहन संवाद और सहयोग को बढ़ावा देगा। भारत मंडपम के लेवल-2 पर होने वाले इन कार्यक्रमों में वैश्विक नेताओं की उपस्थिति के बढ़ते प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसकी प्रासंगिकता को दर्शाती है।
दिन की शुरुआत सुबह 9:55 बजे के सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के आगमन के साथ होगी। यह आगमन शिखर सम्मेलन के अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण सत्रों की शुरुआत का प्रतीक है, जहां विभिन्न देशों के नेता वैश्विक चुनौतियों पर साझा समाधान खोजने की अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
इसके बाद, सुबह 10:35 बजे नेताओं की आधिकारिक फैमिली फोटो का आयोजन किया जाएगा। यह एक पारंपरिक अनुष्ठान है जो समूह की एकता और सामूहिक भावना को प्रदर्शित करता है। यह फोटो सत्र न केवल एक प्रतीकात्मक महत्व रखता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के नेता एक साझा मंच पर आकर वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम सुबह 10:50 बजे शुरू होने वाला का मुख्य ओपन सेशन है। इस सत्र का विषय मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के जरिए समावेशी वैश्विक विकास का भविष्य तैयार करना है। यह विषय के मूल सिद्धांतों को दर्शाता है, जिसमें सदस्य देश वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने, आपसी सहयोग को गहरा करने और टिकाऊ विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने पर जोर देते हैं। ओपन सेशन में विभिन्न देशों के नेता अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे और उन रणनीतियों पर चर्चा करेंगे जो समावेशी वैश्विक विकास को बढ़ावा दे सकती हैं।
शिखर सम्मेलन के अंत में, नई दिल्ली घोषणापत्र जारी किया जाएगा। यह घोषणापत्र शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं, सहमतियों और भविष्य की कार्ययोजना का एक विस्तृत दस्तावेज होगा। इसमें वैश्विक शासन में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों की सामूहिक प्रतिबद्धताओं को रेखांकित किया जाएगा। यह घोषणापत्र के भविष्य के पथ को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में समूह की स्थिति को और मजबूत करेगा।
भारत की अध्यक्षता: मानवता पहले का सिद्धांत और व्यापक पहलें
भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार की अध्यक्षता संभाली है, जो वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती कूटनीतिक क्षमता और नेतृत्व की भूमिका को दर्शाता है। इससे पहले भारत ने 2012, 2016 और 2021 में भी सफलतापूर्वक शिखर सम्मेलनों की मेजबानी की है। प्रत्येक अध्यक्षता के दौरान, भारत ने समूह के एजेंडे को आकार देने और वैश्विक चुनौतियों के लिए रचनात्मक समाधान प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस वर्ष की अध्यक्षता के लिए भारत ने मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण ( , , ) की थीम निर्धारित की है। यह थीम एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें वैश्विक समुदाय को वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जा रहा है। मजबूती का अर्थ है आर्थिक और सामाजिक प्रणालियों को बाहरी झटकों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाना। नवाचार नई प्रौद्योगिकियों और समाधानों को अपनाने पर जोर देता है जो विकास को गति दे सकते हैं। सहयोग सदस्य देशों के बीच और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझेदारी को मजबूत करने पर केंद्रित है। अंत में, टिकाऊ विकास पर्यावरणीय स्थिरता और दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता को उजागर करता है।
भारत की अध्यक्षता का एक केंद्रीय सिद्धांत मानवता पहले है, जिसमें लोगों को केंद्र में रखने पर विशेष जोर दिया गया है। यह सिद्धांत के प्रयासों को समावेशी और न्यायसंगत विकास की दिशा में निर्देशित करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे। यह दृष्टिकोण स्वास्थ्य, शिक्षा, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है, जिससे सदस्य देशों के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
अपनी अध्यक्षता के दौरान, भारत ने के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर गतिविधियों का आयोजन किया है। देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन आयोजनों ने के तीन प्रमुख क्षेत्रों में गहन चर्चा और सहयोग को बढ़ावा दिया है:
- राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग:इस क्षेत्र में वैश्विक शासन में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करने, क्षेत्रीय संघर्षों के समाधान और आतंकवाद जैसे साझा सुरक्षा खतरों का मुकाबला करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- आर्थिक और वित्तीय सहयोग:इस क्षेत्र में व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने, बुनियादी ढांचा विकास को बढ़ावा देने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को गहरा करने पर जोर दिया गया है।
- सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क:यह क्षेत्र शिक्षा, कला, खेल, पर्यटन और युवा आदान-प्रदान के माध्यम से सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित है।
इन पहलों के माध्यम से, भारत ने को एक अधिक गतिशील और परिणाम-उन्मुख समूह बनाने का प्रयास किया है, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और एक अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ विश्व व्यवस्था के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।
का वैश्विक महत्व और सदस्य देश
समूह, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, ने हाल के वर्षों में अपनी सदस्यता का विस्तार किया है, जिससे इसकी वैश्विक पहुंच और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्तमान में, में कुल 11 सदस्य देश हैं, जो इसे एक अधिक विविध और शक्तिशाली मंच बनाते हैं। इन सदस्य देशों में शामिल हैं:
- ब्राजील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- संयुक्त अरब अमीरात
- सऊदी अरब
- इंडोनेशिया
इन देशों का समावेश के भीतर भौगोलिक और आर्थिक विविधता को बढ़ाता है, जिससे यह समूह विभिन्न क्षेत्रों और विकास के स्तरों का प्रतिनिधित्व करता है। नए सदस्यों के जुड़ने से की सामूहिक शक्ति और वैश्विक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की क्षमता में वृद्धि हुई है।
का वैश्विक महत्व इसके आंकड़ों से स्पष्ट होता है। यह समूह दुनिया की आबादी का लगभग 49 5% प्रतिनिधित्व करता है। इसका मतलब है कि विश्व के लगभग आधे लोग देशों में निवास करते हैं, जो इसे मानव संसाधन और उपभोक्ता बाजार के मामले में एक विशाल शक्ति बनाता है। इतनी बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व को वैश्विक विकास और सामाजिक मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण आवाज प्रदान करता है।
आर्थिक मोर्चे पर, देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (सकल घरेलू उत्पाद) का लगभग 40% हिस्सा रखते हैं। यह आंकड़ा समूह की बढ़ती आर्थिक शक्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा निवेश में इसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही हैं और वे वैश्विक आर्थिक विकास के प्रमुख चालक बन गए हैं। उनकी सामूहिक आर्थिक शक्ति उन्हें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और व्यापार वार्ताओं में अधिक प्रभाव डालने में सक्षम बनाती है।
इसके अतिरिक्त, देश वैश्विक व्यापार का लगभग 26% प्रतिनिधित्व करते हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय व्यापार नेटवर्क में महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। वे वस्तुओं और सेवाओं के प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता दोनों हैं, और उनके व्यापारिक संबंध वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और आर्थिक एकीकरण को आकार देते हैं। इन आंकड़ों के साथ, एक ऐसा मंच बन गया है जो न केवल अपने सदस्यों के हितों का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद और एक अधिक संतुलित विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय बैठकें और कूटनीतिक आयाम
शिखर सम्मेलन जैसे बहुपक्षीय मंच, सदस्य देशों के नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और साझा हितों पर चर्चा करने के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं। नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन 2026 के अंतिम दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। ये बैठकें शिखर सम्मेलन के व्यापक एजेंडे से इतर आयोजित की जाएंगी, लेकिन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को साकार करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
द्विपक्षीय बैठकें विभिन्न देशों के बीच विशिष्ट मुद्दों पर गहन चर्चा का अवसर प्रदान करती हैं, जो बहुपक्षीय सत्रों में संभव नहीं हो पाता। इन वार्ताओं में व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विविध विषयों पर चर्चा हो सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की इन बैठकों का उद्देश्य भारत के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, आपसी सहयोग के नए रास्ते तलाशना और वैश्विक तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करना होगा।
ये द्विपक्षीय वार्ताएं भारत की पड़ोसी पहले और एक्ट ईस्ट जैसी विदेश नीति पहलों के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण के साथ संबंधों को गहरा करने की उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती हैं। के भीतर, भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और इन बैठकों के माध्यम से, प्रधानमंत्री मोदी के सदस्य देशों के साथ-साथ आमंत्रित भागीदार देशों के साथ भी अपने संबंधों को मजबूत कर सकते हैं। यह भारत को वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने और विभिन्न भू-राजनीतिक मुद्दों पर अपनी आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने में मदद करेगा।
द्विपक्षीय बैठकों का महत्व केवल तात्कालिक समझौतों या घोषणाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि ये दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारियों की नींव भी रखती हैं। इन वार्ताओं के माध्यम से, नेता व्यक्तिगत संबंध स्थापित करते हैं और विश्वास का निर्माण करते हैं, जो भविष्य में जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग के लिए महत्वपूर्ण होता है। जैसे समूह में, जहां विभिन्न राजनीतिक और आर्थिक प्रणालियों वाले देश एक साथ आते हैं, द्विपक्षीय संवाद आपसी समझ और समूह की समग्र एकजुटता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
के प्रमुख सहयोग क्षेत्र
समूह अपने सदस्य देशों के बीच सहयोग को तीन व्यापक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में केंद्रित करता है, जो समूह के समग्र उद्देश्यों और वैश्विक प्रभाव को आकार देते हैं। ये क्षेत्र न केवल सदस्य देशों के आंतरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि एक अधिक संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी योगदान करते हैं। नीचे दी गई तालिका इन प्रमुख सहयोग क्षेत्रों और उनके मुख्य उद्देश्यों एवं गतिविधियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है:
ये तीनों क्षेत्र के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिसमें न केवल आर्थिक शक्ति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, बल्कि राजनीतिक स्थिरता, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से एक अधिक समावेशी और टिकाऊ वैश्विक समुदाय का निर्माण भी किया जाता है।
| सहयोग का क्षेत्र | मुख्य उद्देश्य एवं गतिविधियाँ |
|---|---|
| राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग | यह क्षेत्र वैश्विक शासन में सुधार लाने, बहुपक्षवाद के सिद्धांतों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। सदस्य देश क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय स्थापित करते हैं, जिसमें आतंकवाद का मुकाबला करना, साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करना और संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान खोजना शामिल है। |
| आर्थिक और वित्तीय सहयोग | यह के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है। इसमें बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं का समर्थन करना, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना, और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों तथा स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना शामिल है। |
| सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क | यह क्षेत्र सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी समझ, सम्मान और संबंधों को गहरा करने पर केंद्रित है। इसमें शिक्षा, कला, खेल, पर्यटन, युवा आदानप्रदान और मीडिया सहयोग जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाना और साझा मूल्यों तथा अनुभवों को बढ़ावा देना है। |
शिखर सम्मेलन 2026 कहाँ आयोजित किया जा रहा है
शिखर सम्मेलन 2026 भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। यह दो दिवसीय सम्मेलन भारत मंडपम के लेवल-2 पर हो रहा है। भारत ने इस वर्ष चौथी बार की अध्यक्षता संभाली है, जिससे यह आयोजन देश के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। नई दिल्ली में इस तरह के उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक क्षमताओं को दर्शाता है।
में वर्तमान में कितने सदस्य देश हैं
समूह में वर्तमान में कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं। मूल रूप से इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। हाल ही में हुए विस्तार के बाद, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया भी इस समूह का हिस्सा बन गए हैं। इन नए सदस्यों के जुड़ने से की भौगोलिक पहुंच और आर्थिक प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे यह वैश्विक मंच पर एक अधिक विविध और शक्तिशाली आवाज बन गया है।
भारत ने की अध्यक्षता कितनी बार की है और इस वर्ष की थीम क्या है
भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार की अध्यक्षता संभाली है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी इस प्रतिष्ठित समूह की अध्यक्षता कर चुका है। इस वर्ष की अध्यक्षता के लिए भारत ने मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण ( , , ) की थीम निर्धारित की है। इस थीम में मानवता पहले के सिद्धांत के साथ लोगों को केंद्र में रखने पर विशेष जोर दिया गया है, जो समावेशी और न्यायसंगत वैश्विक विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
का ओपन सेशन किस विषय पर केंद्रित है
शिखर सम्मेलन 2026 का मुख्य ओपन सेशन मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के जरिए समावेशी वैश्विक विकास का भविष्य तैयार करना (, , : ) विषय पर केंद्रित है। यह सत्र 13 सितंबर को सुबह 10:50 बजे भारत मंडपम में शुरू होगा। इस विषय का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, नई प्रौद्योगिकियों और समाधानों को अपनाने, आपसी सहयोग को गहरा करने और पर्यावरणीय स्थिरता के साथ दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति को बढ़ावा देने पर चर्चा करना है।
नई दिल्ली घोषणापत्र क्या है और इसका क्या महत्व है
नई दिल्ली घोषणापत्र शिखर सम्मेलन 2026 के समापन पर जारी किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह घोषणापत्र शिखर सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं, सदस्य देशों द्वारा प्राप्त सहमतियों और भविष्य की कार्ययोजना का एक विस्तृत सारांश होगा। इसका महत्व इस बात में निहित है कि यह वैश्विक शासन में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों की सामूहिक प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करेगा। यह घोषणापत्र के भविष्य के पथ को निर्धारित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में समूह की स्थिति को और मजबूत करेगा।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन 2026, जो 12 सितंबर को शुरू होकर 13 सितंबर को समाप्त हुआ, वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में समूह की बढ़ती प्रासंगिकता और प्रभाव का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। भारत की चौथी अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन ने वैश्विक शासन, बहुपक्षवाद और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान किया। मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण की थीम के तहत, भारत ने मानवता पहले के सिद्धांत पर जोर देते हुए समावेशी वैश्विक विकास के लिए एक दूरदर्शी एजेंडा प्रस्तुत किया।
शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन का विस्तृत कार्यक्रम, जिसमें राष्ट्राध्यक्षों का आगमन, आधिकारिक फैमिली फोटो और मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के जरिए समावेशी वैश्विक विकास का भविष्य तैयार करना विषय पर केंद्रित मुख्य ओपन सेशन शामिल था, ने समूह के सामूहिक संकल्प को उजागर किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चार देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
समूह, जिसमें अब 11 सदस्य देश शामिल हैं, दुनिया की लगभग आधी आबादी, 40% सकल घरेलू उत्पाद और 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है, जो इसकी अपार शक्ति और अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की क्षमता को दर्शाता है। राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग, आर्थिक और वित्तीय सहयोग, तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में का निरंतर सहयोग एक अधिक संतुलित, न्यायसंगत और टिकाऊ विश्व व्यवस्था के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण है।
शिखर सम्मेलन के समापन पर जारी किया जाने वाला नई दिल्ली घोषणापत्र देशों की साझा प्रतिबद्धताओं और भविष्य की कार्ययोजना का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा। यह घोषणापत्र वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए समूह के सामूहिक प्रयासों को दिशा प्रदान करेगा। कुल मिलाकर, शिखर सम्मेलन 2026 ने न केवल सदस्य देशों के बीच सहयोग को गहरा किया है, बल्कि एक ऐसे भविष्य की नींव भी रखी है जहां बहुपक्षवाद और साझा जिम्मेदारी वैश्विक प्रगति के केंद्र में हों।
