जीएसटी में 401 करोड़ रुपए के गोलमाल का बड़ा खुलासा: सीएजी रिपोर्ट ने दिखाई विभाग की कमियां
कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) द्वारा प्रस्तुत एक ऑडिट रिपोर्ट में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण और ठेकेदार क्षेत्र में जीएसटी नॉन कंप्लायंस के कुल 1,334 मामलों का पता चला है, जिनमें 401 42 करोड़ रुपए की राशि शामिल है। इनमें से 903 मामलों में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने ऑडिटरों की टिप्पणियों को स्वीकार कर लिया है, जिनकी कुल राशि 268 36 करोड़ रुपए है। अब तक केवल 15 88 करोड़ रुपए की वसूली संभव हो सकी है।
यह रिपोर्ट मार्च 2024 तक की अवधि के लिए तैयार की गई थी और इसे हाल ही में संसद में पेश किया गया। ऑडिटरों ने कुल 850 करदाताओं और 71 जीएसटी विभागीय कार्यालयों के रिकॉर्ड की जांच की। मुख्य रूप से जांच अवधि 2020-21 और 2021-22 थी, हालांकि कुछ मामलों में ऑडिटरों ने बाद के वर्षों 2023-24 तक भी नजर रखी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्या वही समस्याएं बनी हुई हैं।
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जीएसटी विभाग द्वारा इन अनियमितताओं की पहचान के बावजूद, वसूली की प्रक्रिया बेहद धीमी रही है। विभाग ने स्वीकृत मामलों में वसूली शुरू कर दी है, लेकिन कुल मिलाकर रेवेन्यू पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए यह प्रयास पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
मुख्य अनियमितताओं के प्रकार और उनका प्रभाव
- रियायती दरों और छूट के गलत दावे:सड़कों, पुलों, रेलवे और मिट्टी के काम के ठेकेदारों द्वारा सरकारी निकायों के लिए किए गए कार्यों पर रियायती दरों या छूट के गलत दावे किए गए। इनमें से 123 मामलों में कुल 190 98 करोड़ रुपए का राजस्व प्रभाव पड़ा।
- टैक्स का कम भुगतान:सरकारी निकायों के लिए किए गए कार्यों पर कर का कम भुगतान किया गया। 522 करदाताओं से संबंधित 1,057 कमियों में कुल 188 98 करोड़ रुपए का राजस्व प्रभाव देखा गया।
- रिवर्स चार्ज के तहत कम भुगतान:बिल्डर्स और डेवलपर्स द्वारा रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत कर का कम भुगतान किया गया।
- अनियमित इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी):चालू और पूर्ण परियोजनाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे में अनियमितताएं पाई गईं।
- सेवा कोड और व्यवसाय स्थानों की गलत घोषणा:करदाताओं द्वारा अपने व्यवसाय के अतिरिक्त स्थानों की घोषणा करने में विफलता और गलत सेवा कोड का उपयोग किया गया।
- ब्याज की कम वसूली:आईटीसी के दावों और कर भुगतान के बीच बेमेल देखा गया, जिससे ब्याज की वसूली प्रभावित हुई।
विभागीय कमियां और ऑडिट में चुनौतियां
ऑडिटरों को रिकॉर्ड प्राप्त करने में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुल 392 करदाताओं से संबंधित 431 मामलों में, विस्तृत दस्तावेज पूरी तरह से प्रस्तुत नहीं किए गए थे। इन मामलों में कर देनदारी, आईटीसी और रियायती दरों में कुल 2,732 56 करोड़ रुपए का बेमेल पाया गया। इसके अतिरिक्त, 22 मामलों में विभाग के सिस्टम से मूल रिटर्न और विवरण गायब थे, जो 36 09 करोड़ रुपए के संभावित बेमेल की ओर इशारा करते हैं।
जीएसटी विभाग के कार्यालयों की निगरानी प्रणाली भी कमजोर पाई गई। जांचे गए 71 कार्यालयों में से 57 में खामियां पाई गईं। कई स्थानों पर जांच या तो ठीक से नहीं की गई या देरी से की गई। ऑडिट और जोखिम प्रबंधन महानिदेशालय से जोखिम अलर्ट पर फॉलोअप एक्शन कई मामलों में अधूरे थे।
जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) प्रणाली में कमियां
सीएजी ऑडिट के तीसरे चरण में जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) प्रणाली की भी जांच की गई। पिछले ऑडिट के 56 लंबित मुद्दों में से, जीएसटीएन ने 38 को ठीक कर दिया है। एक मामले को आंशिक रूप से ठीक किया गया है और तीन मामले प्रक्रियाधीन हैं, जबकि शेष मामले या तो अनसुलझे हैं या आंशिक रूप से संबोधित किए गए हैं।
जीएसटीएन प्रणाली में प्रमुख कमियां निम्नलिखित हैं:
- रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल:कमजोर वेरिफिकेशन और अनुमोदन या रद्दीकरण में देरी।
- रिटर्न मॉड्यूल:पात्रता, ब्याज गणना, आईटीसी रिवर्सल और क्रमिक फाइलिंग के लिए अपूर्ण जांच।
- इंटीग्रेटेड जीएसटी सेटलमेंट:कुछ रिपोर्ट तैयार नहीं की गईं और विभाजन संबंधी त्रुटियां देखी गईं।
- कंपोजीशन लेवी स्कीम:करदाताओं की निगरानी अपर्याप्त पाई गई।
हालांकि, जीएसटीएन प्रणाली आईटी प्रशासन और सुरक्षा के मामले में काफी हद तक अनुरूप पाई गई, लेकिन उच्च पोर्टल क्षमता और अधिक लचीले डेटा सेंटर्स की योजना में अभी भी खामियां बनी हुई हैं।
राजस्व संग्रह में वृद्धि के बावजूद चुनौतियां
वर्ष 2023-24 में इनडायरेक्ट टैक्स संग्रह में साल-दर-साल 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 1 14 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से केंद्रीय जीएसटी में 13 प्रतिशत (1 08 लाख करोड़ रुपए) की वृद्धि के कारण हुई। हालांकि, कुल इनडायरेक्ट टैक्स-से-जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) अनुपात 5 15 प्रतिशत से घटकर 4 98 प्रतिशत हो गया, जिसका मुख्य कारण केंद्रीय उत्पाद शुल्क राजस्व में गिरावट जारी रहना है।
इस वृद्धि के बावजूद, जीएसटी प्रणाली में मौजूद कमजोरियां और अनियमितताएं राजस्व संग्रह को जोखिम में डाल रही हैं। निर्माण क्षेत्र के करदाताओं द्वारा अनुपालन में अंतर और शेष प्रणालीगत कमजोरियां सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
जीएसटी गोलमाल के प्रमुख कारण और विभागीय जवाबदेही
1 सब-कांट्रैक्टर्स द्वारा रियायतों के गलत दावे
- मुद्दा:सड़क, पुल, रेलवे और मिट्टी के काम के ठेकेदारों द्वारा सरकारी निकायों के लिए किए गए कार्यों पर रियायती दरों या छूट के गलत दावे किए गए।
- प्रभाव:कुल 123 मामलों में 190 98 करोड़ रुपए का राजस्व प्रभाव पड़ा।
- विभागीय जवाबदेही:सीएजी ने सिफारिश की है कि विभाग इन सब-कांट्रैक्टर्स की जांच और आंतरिक ऑडिट का विस्तार करे तथा ऐसे दावों की जांच के लिए सिस्टम में वेरिफिकेशन कंट्रोल रखे।
2 रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म का दुरुपयोग
- मुद्दा:बिल्डर्स और डेवलपर्स द्वारा रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत कर का कम भुगतान किया गया, विशेष रूप से उन मामलों में जहां काम करने वाले ठेकेदार अनरजिस्टर्ड सप्लायर्स से खरीद करते हैं या सरकार से सेवाएं प्राप्त करते हैं।
- प्रभाव:इससे सरकार को राजस्व की हानि हुई।
- विभागीय जवाबदेही:सीएजी ने रिवर्स-चार्ज मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की सिफारिश की है।
3 इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में अनियमितताएं
- मुद्दा:चालू और पूर्ण परियोजनाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावों में अनियमितताएं पाई गईं। करदाताओं द्वारा आईटीसी के दावे और वास्तविक कर भुगतान के बीच बेमेल देखा गया।
- प्रभाव:इससे सरकार को राजस्व की हानि हुई और कर प्रणाली में विश्वास कम हुआ।
- विभागीय जवाबदेही:सीएजी ने आईटीसी के दावों की जांच के लिए सिस्टम में सुधार और आंतरिक ऑडिट को मजबूत करने की सिफारिश की है।
4 जीएसटी विभागीय कार्यालयों की कमजोर निगरानी
- मुद्दा:जीएसटी विभाग के 71 कार्यालयों में से 57 में निगरानी प्रणाली में खामियां पाई गईं। कई स्थानों पर जांच या तो ठीक से नहीं की गई या देरी से की गई।
- प्रभाव:इससे अनियमितताओं का पता लगाने और उन्हें रोकने में देरी हुई।
- विभागीय जवाबदेही:सीएजी ने विभागीय निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और जोखिम अलर्ट पर फॉलोअप एक्शन में सुधार करने की सिफारिश की है।
5 जीएसटीएन प्रणाली में तकनीकी कमियां
- मुद्दा:जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) प्रणाली में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न और सेटलमेंट मॉड्यूल में तकनीकी कमियां पाई गईं।
- प्रभाव:इससे करदाताओं को सेवाएं प्रदान करने में कठिनाइयां आईं और प्रणालीगत कमजोरियां उत्पन्न हुईं।
- विभागीय जवाबदेही:सीएजी ने जीएसटीएन प्रणाली में सुधार और तकनीकी कमियों को दूर करने की सिफारिश की है।
जीएसटी गोलमाल: सीबीआईसी और जीएसटीएन की प्रतिक्रिया
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की प्रतिक्रिया
सीबीआईसी ने सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में उठाई गई टिप्पणियों को स्वीकार कर लिया है। विभाग ने स्वीकृत मामलों में वसूली प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, कुल मिलाकर वसूली की रफ्तार धीमी रही है। विभाग ने यह भी स्वीकार किया है कि जीएसटी प्रणाली में मौजूद कमजोरियों को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सीबीआईसी ने यह भी बताया है कि निर्माण क्षेत्र के करदाताओं द्वारा अनुपालन में अंतर को दूर करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। विभाग ने करदाताओं को जागरूक करने और उनके अनुपालन में सुधार लाने के लिए कई कदम उठाए हैं।
जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) की प्रतिक्रिया
जीएसटीएन ने सीएजी ऑडिट के तीसरे चरण में उठाई गई तकनीकी कमियों को स्वीकार किया है। जीएसटीएन ने बताया है कि 56 लंबित मुद्दों में से 38 को ठीक कर दिया गया है, एक मामले को आंशिक रूप से ठीक किया गया है और तीन मामले प्रक्रियाधीन हैं। शेष मामलों पर भी काम जारी है।
जीएसटीएन ने यह भी स्वीकार किया है कि रजिस्ट्रेशन, रिटर्न और सेटलमेंट मॉड्यूल में तकनीकी कमियां मौजूद थीं, जिन्हें दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जीएसटीएन प्रणाली की सुरक्षा और आईटी प्रशासन को काफी हद तक अनुरूप पाया गया है, लेकिन उच्च पोर्टल क्षमता और लचीले डेटा सेंटर्स की योजना में अभी भी सुधार की गुंजाइश है।
अन्य राज्यों में जीएसटी अनियमितताओं के मामले
सीएजी की रिपोर्ट के अलावा, देश के विभिन्न राज्यों में भी जीएसटी अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी और कर चोरी के आरोप शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में स्क्रैप फर्म पर जीएसटी छापा
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) ने एक स्क्रैप रीसाइक्लिंग फर्म पर छापा मारा। इस फर्म ने 29 5 करोड़ रुपए के कारोबार में केवल 1 5 करोड़ रुपए का जीएसटी भरा था। इसके अतिरिक्त, फर्म ने 7 31 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी की थी। फर्म द्वारा 11 माह तक निल रिटर्न दाखिल किया गया था।
हरियाणा के गुरुग्राम में 200 करोड़ रुपए के फर्जी आईटीसी घोटाले का पर्दाफाश
हरियाणा के गुरुग्राम में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) आयुक्तालय ने 200 करोड़ रुपए के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का पर्दाफाश किया। इस मामले में एक ऑटो सर्विस फर्म के दो पूर्व सह-संस्थापकों और दो अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। घोटाले में फर्जी बिल बनाकर आईटीसी का दावा किया गया था।
लखनऊ में 16 65 करोड़ रुपए के जीएसटी घोटाले का खुलासा
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में राज्य कर विभाग ने फर्जी बिलों के जरिए 16 65 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी का खुलासा किया। एक ही परिवार की तीन फर्मों ने बिना खरीद-बिक्री के सर्कुलर ट्रेडिंग कर कर चोरी की थी।
तुलनात्मक विश्लेषण एवं मुख्य बिंदु
| मापदंड | मुख्य विवरण एवं तथ्य | दूरगामी प्रभाव |
|---|---|---|
| मुख्य विषय | संबद्ध विषय पर विस्तृत समीक्षा एवं आंकड़े | पारदर्शिता में सुधार |
| प्रशासनिक स्थिति | नियमों एवं दिशानिर्देशों के तहत त्वरित कार्रवाई | प्रक्रिया सुदृढ़ एवं प्रभावी |
| सामाजिक प्रभाव | स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता प्रसार | सुरक्षा एवं विश्वास में वृद्धि |
| भविष्य की दिशा | सत्यापित डेटा के आधार पर आगामी योजनाएं | दीर्घकालिक विकास दर में मदद |
जीएसटी गोलमाल से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1 सीएजी रिपोर्ट में जीएसटी गोलमाल के कितने मामले सामने आए हैं
सीएजी रिपोर्ट में वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में कुल 1,334 मामलों का पता चला है, जिनमें 401 42 करोड़ रुपए की राशि शामिल है।
2 सीबीआईसी ने कितने मामलों में टिप्पणियों को स्वीकार किया है
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कुल 903 मामलों में ऑडिटरों की टिप्पणियों को स्वीकार किया है, जिनकी कुल राशि 268 36 करोड़ रुपए है।
3 अब तक कितनी राशि की वसूली हुई है
अब तक केवल 15 88 करोड़ रुपए की वसूली संभव हो सकी है।
4 जीएसटी गोलमाल के प्रमुख कारण क्या हैं
जीएसटी गोलमाल के प्रमुख कारणों में रियायती दरों के गलत दावे, टैक्स का कम भुगतान, रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म का दुरुपयोग, इनपुट टैक्स क्रेडिट में अनियमितताएं, सेवा कोड और स्थानों की गलत घोषणा, तथा जीएसटी विभागीय कार्यालयों की कमजोर निगरानी शामिल हैं।
5 सीएजी ने किन सुधारों की सिफारिश की है
सीएजी ने सिफारिश की है कि विभाग सब-कांट्रैक्टर्स द्वारा रियायतों के दावों की जांच और आंतरिक ऑडिट का विस्तार करे, रिवर्स-चार्ज मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करे, तथा इनकम टैक्स विभाग के साथ समन्वय में सुधार करे ताकि बेहिसाब आय की भी जीएसटी देनदारी के लिए जांच की जा सके।
निष्कर्ष
कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सीएजी) की ऑडिट रिपोर्ट में जीएसटी प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। कुल 1,334 मामलों में 401 42 करोड़ रुपए की राशि शामिल है, जिनमें से 903 मामलों में सीबीआईसी ने टिप्पणियों को स्वीकार किया है। हालांकि, अब तक केवल 15 88 करोड़ रुपए की वसूली संभव हो सकी है, जो राजस्व संग्रह के लिए चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में जीएसटी विभागीय कार्यालयों की कमजोर निगरानी, जीएसटीएन प्रणाली में तकनीकी कमियां, तथा करदाताओं द्वारा अनुपालन में अंतर जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है। इन कमियों को दूर करने के लिए सीबीआईसी और जीएसटीएन द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वसूली की प्रक्रिया धीमी रही है।
इसके अतिरिक्त, देश के विभिन्न राज्यों में भी जीएसटी अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, जिनमें फर्जी बिलिंग, इनपुट टैक्स क्रेडिट धोखाधड़ी और कर चोरी शामिल हैं। इन मामलों से स्पष्ट होता है कि जीएसटी प्रणाली में मौजूद कमजोरियों को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
जीएसटी प्रणाली में सुधार लाने और करदाताओं के अनुपालन में वृद्धि करने के लिए विभागीय निगरानी को मजबूत करना, तकनीकी कमियों को दूर करना, तथा करदाताओं को जागरूक करना आवश्यक है। केवल तभी जीएसटी प्रणाली में विश्वास बहाल किया जा सकता है और राजस्व संग्रह में वृद्धि की जा सकती है।
