झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा घोटाले में की बड़ी कार्रवाई: 18 स्थानों पर छापेमारी, बरामद हुए गोपनीय दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण
झारखंड में लोक सेवा आयोग () की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। अपराध अनुसंधान विभाग () ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को राज्य के पांच प्रमुख जिलों में एक साथ 18 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बरामद किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, बरामद सामग्री में लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, अभ्यर्थियों की शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट और अन्य संवेदनशील दस्तावेज शामिल हैं।
इस कार्रवाई के पीछे मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में व्याप्त कथित अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क को उजागर करना है। के अधिकारियों ने बताया कि बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच की जाएगी ताकि परीक्षा प्रक्रिया में हुई धांधली के पूरे तंत्र का पता लगाया जा सके। इस मामले में अभय तिवारी नामक व्यक्ति को मुख्य आरोपी के रूप में चिह्नित किया गया है, जिन्होंने पिछले 13 वर्षों में विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की थी।
इस बीच, राज्य सरकार ने भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाते हुए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की तैयारी शुरू कर दी है। यह समिति आंदोलनरत छात्रों से संवाद स्थापित करेगी और उनकी प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाएगी। सरकार के सूत्रों के अनुसार, यह समिति राज्य सरकार के दो मंत्रियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर बनेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि और जैसी प्रमुख परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और अनियमितताओं के आरोपों ने राज्य में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्र संगठनों द्वारा लगातार आंदोलन किए जा रहे हैं, जिसके दबाव में सरकार को कठोर कदम उठाने पड़े हैं।
की कार्रवाई का विस्तृत विवरण
द्वारा की गई छापेमारी राज्य के पांच प्रमुख जिलों—रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद—में की गई। इन स्थानों पर कुल 18 ठिकानों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में व्याप्त कथित अनियमितताओं के पूरे तंत्र को उजागर करना था।
- बरामद सामग्री:लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, अभ्यर्थियों की शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट, चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण।
- जांच का दायरा:द्वारा बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच की जाएगी ताकि परीक्षा प्रक्रिया में हुई धांधली के पूरे तंत्र का पता लगाया जा सके।
- मुख्य आरोपी:अभय तिवारी, जिन्होंने पिछले 13 वर्षों में विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की थी।
- संबंधित परीक्षाएं:पुलिस अवर निरीक्षक परीक्षा (2018), नेवी भर्ती (2013), सहायक परीक्षा (2014), कांस्टेबल भर्ती, हेड कांस्टेबल परीक्षा, भर्ती परीक्षा, की शिक्षक और परीक्षाएं, की , और परीक्षाएं एवं 11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षाएं।
- अनुरोध पत्र:ने संबंधित भर्ती एवं परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों को पत्र लिखकर अभ्यर्थिता से जुड़े रिकॉर्ड, आवेदन पत्र, मूल्यांकन अभिलेख, चयन प्रक्रिया का विवरण और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
राज्य सरकार की तैयारी: उच्च स्तरीय समिति का गठन
झारखंड सरकार ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाते हुए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की तैयारी शुरू कर दी है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य आंदोलनरत छात्रों से संवाद स्थापित करना और उनकी प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाना है।
- समिति के सदस्य:राज्य सरकार के दो मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी।
- समिति का कार्य:छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत करना, उनकी प्रमुख मांगों और आपत्तियों को विस्तार से सुनना तथा अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपना।
- संभावित निर्णय:सरकार 14वीं पीटी परीक्षा को रद्द करने के मुद्दे पर भी बड़ा निर्णय ले सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
- राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव:और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है, जिसके कारण राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
छात्र आंदोलन और राजनीतिक प्रतिक्रिया
झारखंड में और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र संगठनों द्वारा लगातार आंदोलन किए जा रहे हैं। इस मामले में राज्य भर के छात्रों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया है और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है।
- आंदोलन का कारण:अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में बड़े स्तर पर धांधली हुई है, जिसके कारण योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान पहुंचा है।
- प्रदर्शन का स्वरूप:रांची सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया है।
- राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया:विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मामले में सरकार से जवाबदेही की मांग की है। कुछ दलों ने तो सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तक लाने की बात कही है।
- प्रशासनिक दबाव:राज्य सरकार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, जिसके कारण सरकार को कठोर कदम उठाने पड़े हैं।
पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से पूछताछ
इस मामले में ने के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से भी पूछताछ की है। अधिकारियों के अनुसार, यह पूछताछ परीक्षा प्रणाली में व्याप्त कथित अनियमितताओं के संदर्भ में की गई है। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
- पूछताछ का उद्देश्य:परीक्षा प्रणाली में व्याप्त कथित अनियमितताओं के संदर्भ में एल. ख्यांगते से पूछताछ की गई।
- अभी तक की स्थिति:इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
- अगले कदम:द्वारा बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
की कार्रवाई और बरामद सामग्री: तुलनात्मक विश्लेषण
| मापदंड | की कार्रवाई (3 अगस्त 2026) | पिछले वर्षों में हुई कार्रवाइयां |
|---|---|---|
| छापेमारी के स्थान | रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद (कुल 18 स्थान) | सीमित स्थानों पर कार्रवाई, मुख्यतः रांची तक सीमित |
| बरामद सामग्री | लैपटॉप, मोबाइल, शीट, मार्कशीट, बैंक पासबुक, चेकबुक, एडमिट कार्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण | मुख्यतः दस्तावेजों तक सीमित, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कमी |
| मुख्य आरोपी | अभय तिवारी (13 वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं में सफल) | अज्ञात या छोटे स्तर के आरोपी |
| जांच का दायरा | फॉरेंसिक जांच सहित पूरे नेटवर्क की पड़ताल | मुख्यतः कागजी जांच तक सीमित |
| राजनीतिक प्रतिक्रिया | उच्च स्तरीय समिति का गठन, सरकार पर दबाव | सीमित राजनीतिक प्रतिक्रिया |
| छात्र आंदोलन | राज्यव्यापी आंदोलन, सरकार के खिलाफ प्रदर्शन | स्थानीय स्तर तक सीमित |
1. द्वारा की गई छापेमारी का मुख्य उद्देश्य क्या था?
द्वारा की गई छापेमारी का मुख्य उद्देश्य झारखंड लोक सेवा आयोग () की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क को उजागर करना था। अधिकारियों ने बताया कि बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच के बाद परीक्षा प्रक्रिया में हुई धांधली के पूरे तंत्र का पता लगाया जा सकेगा।
2. बरामद सामग्री में कौन-कौन से महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल थे?
बरामद सामग्री में लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, अभ्यर्थियों की शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड, मार्कशीट, चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल थे।
3. मुख्य आरोपी अभय तिवारी कौन हैं और उनका क्या संबंध है?
अभय तिवारी मुख्य आरोपी हैं, जिन्होंने पिछले 13 वर्षों में विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की थी। इन परीक्षाओं में पुलिस अवर निरीक्षक परीक्षा (2018), नेवी भर्ती (2013), सहायक परीक्षा (2014), कांस्टेबल भर्ती, हेड कांस्टेबल परीक्षा, भर्ती परीक्षा, की शिक्षक और परीक्षाएं, की , और परीक्षाएं एवं 11वीं से 13वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षाएं शामिल हैं।
4. राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति का उद्देश्य क्या है?
राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य आंदोलनरत छात्रों से संवाद स्थापित करना और उनकी प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। इस समिति में राज्य सरकार के दो मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे।
5. क्या 14वीं पीटी परीक्षा रद्द होने की संभावना है?
हां, सरकार 14वीं पीटी परीक्षा को रद्द करने के मुद्दे पर बड़ा निर्णय ले सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
निष्कर्ष
झारखंड लोक सेवा आयोग () की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में अपराध अनुसंधान विभाग () द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई ने राज्य भर में हलचल मचा दी है। सोमवार, 3 अगस्त 2026 को राज्य के पांच प्रमुख जिलों में 18 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, शीट, मार्कशीट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए।
इस कार्रवाई के पीछे मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में व्याप्त कथित अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क को उजागर करना था। द्वारा बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच के बाद परीक्षा प्रक्रिया में हुई धांधली के पूरे तंत्र का पता लगाया जा सकेगा। मुख्य आरोपी अभय तिवारी, जिन्होंने पिछले 13 वर्षों में विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की थी, इस मामले में प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं।
इस बीच, राज्य सरकार ने भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाते हुए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की तैयारी शुरू कर दी है। इस समिति का मुख्य उद्देश्य आंदोलनरत छात्रों से संवाद स्थापित करना और उनकी प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। सरकार के सूत्रों के अनुसार, यह समिति राज्य सरकार के दो मंत्रियों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर बनेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि और जैसी प्रमुख परीक्षाओं में पारदर्शिता की कमी और अनियमितताओं के आरोपों ने राज्य में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। छात्र संगठनों द्वारा लगातार आंदोलन किए जा रहे हैं, जिसके दबाव में सरकार को कठोर कदम उठाने पड़े हैं।
अगले कुछ दिनों में द्वारा बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है, लेकिन राज्यव्यापी आंदोलन और राजनीतिक दबाव के कारण सरकार को शीघ्र निर्णय लेना होगा।
