झांसी जेल में बंद अली टूट गए: छोटे भाई आबान की मौत ने तोड़ दिया
उत्तर प्रदेश के झांसी जेल में बंद माफिया अतीक अहमद के बड़े बेटे अली अहमद अपने छोटे भाई आबान की सड़क हादसे में हुई मौत से पूरी तरह टूट गए हैं। भाई के गुजर जाने की खबर मिलते ही अली फूट-फूटकर रोने लगे और बार-बार यही कहते रहे, ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया…’। हादसे के बाद से अली गहरे सदमे में हैं। उन्होंने पिछले दो दिनों से न तो खाना खाया है और न ही एक पल के लिए सो सके हैं।
आबान की मौत की खबर मिलने के बाद अली की हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई थी। हालांकि, जेल अधिकारियों ने उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई। अली लगातार रोते रहे और खुद को अपनी कोठरी में बंद किए रहे। रातभर करवटें बदल-बदलकर रोते रहने के कारण उनकी नींद पूरी तरह से खराब हो गई है।
अली और आबान के बीच भाई-भाई का बेहद गहरा रिश्ता था। आबान हर महीने 3-4 बार झांसी जेल में अली से मिलने जाते थे। मुलाकात के दौरान दोनों भाई काफी देर तक एक-दूसरे से गले मिले रहते थे। आबान जब भी मिलने आता था, अपने भाई के पढ़ने के लिए नॉवेल और किताबें साथ लाता था। दुर्घटनाग्रस्त कार के मलबे से पुलिस को दो किताबें बरामद हुई हैं, जिन्हें वह अली को देने जा रहा था। इनमें ‘द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान’ और ‘द इडियट’ शामिल हैं।
छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली और लखनऊ जेल में बंद बड़े भाई उमर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े। अली ने रोते हुए जज से प्रार्थना की कि उन्हें भाई के जनाजे में जाने दिया जाए।
हाईकोर्ट की पीठ (जस्टिस अजय भनोट और डीसी सामंत) ने सख्त शर्तों के साथ दोनों भाइयों को पैरोल दे दी है। कोर्ट के आदेशानुसार, अली और उमर को कड़ी पुलिस सुरक्षा में सीधे प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाएगा, जहां वे परिवार के सदस्यों के साथ अंतिम क्रियाक्रम में शामिल होकर एक घंटे तक रुक सकेंगे। इसके बाद दोनों को तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा।
आबान की मौत का कारण: तेज रफ्तार कार का हादसा
आबान की मौत एक सड़क हादसे में हुई। पूंछ थाना क्षेत्र के हाईवे पर जानवर को बचाने के चक्कर में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार 7 फीट हवा में उछल गई। इस हादसे में आबान की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे से कुछ मिनट पहले आबान ने एक दरोगा को फोन पर कहा था, ‘मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई।’ यह उनके अंतिम शब्द साबित हुए। आबान की मौत की खबर मिलते ही झांसी जेल में बंद अली पूरी तरह से टूट गए। उन्होंने बार-बार यही कहा, ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया…’।
अली और आबान का भाई-भाई का रिश्ता
- गहरा प्रेम:अली और आबान के बीच भाई-भाई का बेहद गहरा रिश्ता था। अली अपने छोटे भाई को जी-जान से चाहते थे।
- नियमित मुलाकात:आबान हर महीने 3-4 बार झांसी जेल में अली से मिलने जाते थे।
- गले मिलने की आदत:मुलाकात के दौरान दोनों भाई काफी देर तक एक-दूसरे से गले मिले रहते थे।
- पढ़ने की आदत:आबान जब भी मिलने आता था, अपने भाई के पढ़ने के लिए नॉवेल और किताबें साथ लाता था।
- अंतिम उपहार:दुर्घटनाग्रस्त कार के मलबे से पुलिस को दो किताबें बरामद हुई हैं, जिन्हें वह अली को देने जा रहा था।
अली की हालत: सदमे में, भूखे और सोए नहीं
- गहरा सदमा:आबान की मौत की खबर मिलते ही अली पूरी तरह से टूट गए। उन्होंने बार-बार यही कहा, ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया…’।
- भूखे रहने का फैसला:हादसे के बाद से अली ने न तो खाना खाया है और न ही एक पल के लिए सो सके हैं।
- जेल अधिकारियों की चिंता:अली की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत आ गई थी। हालांकि, जेल अधिकारियों ने उन्हें तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई।
- रोते रहने का सिलसिला:रातभर करवटें बदल-बदलकर रोते रहने के कारण उनकी नींद पूरी तरह से खराब हो गई है।
हाईकोर्ट ने दी पैरोल: सख्त शर्तों के साथ मिली राहत
छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली और लखनऊ जेल में बंद बड़े भाई उमर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े। अली ने रोते हुए जज से प्रार्थना की कि उन्हें भाई के जनाजे में जाने दिया जाए।
हाईकोर्ट की पीठ (जस्टिस अजय भनोट और डीसी सामंत) ने सख्त शर्तों के साथ दोनों भाइयों को पैरोल दे दी है। कोर्ट के आदेशानुसार, अली और उमर को कड़ी पुलिस सुरक्षा में सीधे प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाएगा, जहां वे परिवार के सदस्यों के साथ अंतिम क्रियाक्रम में शामिल होकर एक घंटे तक रुक सकेंगे। इसके बाद दोनों को तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा।
पैरोल की शर्तें
अली और आबान का परिवार: माफिया अतीक अहमद के बेटे
अली और आबान माफिया अतीक अहमद के बेटे हैं। अतीक अहमद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और अपराध जगत में एक विवादित शख्सियत रहे हैं। उनके परिवार के सदस्यों पर कई गंभीर आरोप लगे हैं।
अली और आबान के परिवार में उनके बड़े भाई उमर भी शामिल हैं, जो वर्तमान में लखनऊ जेल में बंद हैं। उमर ने भी छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
परिवार के सदस्यों की स्थिति
- अली अहमद:झांसी जेल में बंद हैं। छोटे भाई आबान की मौत से पूरी तरह टूट गए हैं।
- उमर अहमद:लखनऊ जेल में बंद हैं। छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी।
- आबान अहमद:सड़क हादसे में मौत हो गई।
- अतीक अहमद:माफिया के रूप में जाने जाते हैं। उनके परिवार के सदस्यों पर कई गंभीर आरोप लगे हैं।
सड़क हादसे का विवरण: तेज रफ्तार कार का टक्कर
आबान की मौत एक सड़क हादसे में हुई। पूंछ थाना क्षेत्र के हाईवे पर जानवर को बचाने के चक्कर में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार 7 फीट हवा में उछल गई। इस हादसे में आबान की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे से कुछ मिनट पहले आबान ने एक दरोगा को फोन पर कहा था, ‘मुलाकात करने आ रहा हूं, थोड़ी देर हो गई।’ यह उनके अंतिम शब्द साबित हुए।
हादसे के कारण
- तेज रफ्तार:आबान की कार तेज रफ्तार से चल रही थी।
- जानवर बचाने का प्रयास:हाईवे पर जानवर को बचाने के चक्कर में कार डिवाइडर से टकरा गई।
- भीषण टक्कर:टक्कर इतनी भीषण थी कि कार 7 फीट हवा में उछल गई।
- मौके पर मौत:इस हादसे में आबान की मौके पर ही मौत हो गई।
| शर्त | विवरण |
|---|---|
| पुलिस सुरक्षा | अली और उमर को कड़ी पुलिस सुरक्षा में प्रयागराज ले जाया जाएगा। |
| समय सीमा | वे केवल एक घंटे तक ही कब्रिस्तान में रुक सकेंगे। |
| तुरंत वापसी | एक घंटे बाद दोनों को तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा। |
| वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग | अर्जी दाखिल करने के दौरान दोनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े थे। |
| अर्जी की प्रक्रिया | अली और उमर ने छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: अली, आबान और पैरोल से जुड़े सवाल-जवाब
1. अली अहमद कौन हैं और वे कहां बंद हैं?
अली अहमद माफिया अतीक अहमद के बड़े बेटे हैं। वे वर्तमान में उत्तर प्रदेश के झांसी जेल में बंद हैं।
2. आबान अहमद की मौत कैसे हुई?
आबान अहमद की मौत एक सड़क हादसे में हुई। पूंछ थाना क्षेत्र के हाईवे पर जानवर को बचाने के चक्कर में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार 7 फीट हवा में उछल गई। इस हादसे में आबान की मौके पर ही मौत हो गई।
3. अली अहमद की हालत क्या है?
आबान की मौत की खबर मिलते ही अली पूरी तरह से टूट गए हैं। वे पिछले दो दिनों से न तो खाना खा रहे हैं और न ही सो सके हैं। वे लगातार रोते रहे हैं और बार-बार यही कहते रहे, ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया…’।
4. हाईकोर्ट ने पैरोल क्यों दी?
छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली और लखनऊ जेल में बंद बड़े भाई उमर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ दोनों भाइयों को पैरोल दे दी है, ताकि वे छोटे भाई के जनाजे में शामिल हो सकें।
5. पैरोल की शर्तें क्या हैं?
हाईकोर्ट ने पैरोल देते हुए सख्त शर्तें लगाई हैं। अली और उमर को कड़ी पुलिस सुरक्षा में सीधे प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाएगा, जहां वे परिवार के सदस्यों के साथ अंतिम क्रियाक्रम में शामिल होकर एक घंटे तक रुक सकेंगे। इसके बाद दोनों को तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा।
निष्कर्ष
झांसी जेल में बंद अली अहमद अपने छोटे भाई आबान की सड़क हादसे में हुई मौत से पूरी तरह टूट गए हैं। भाई के गुजर जाने की खबर मिलते ही अली फूट-फूटकर रोने लगे और बार-बार यही कहते रहे, ‘अब भाई भी मुझे छोड़कर चला गया…’। हादसे के बाद से अली गहरे सदमे में हैं। उन्होंने पिछले दो दिनों से न तो खाना खाया है और न ही एक पल के लिए सो सके हैं।
छोटे भाई के जनाजे में शामिल होने के लिए झांसी जेल में बंद अली और लखनऊ जेल में बंद बड़े भाई उमर ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। हाईकोर्ट की पीठ (जस्टिस अजय भनोट और डीसी सामंत) ने सख्त शर्तों के साथ दोनों भाइयों को पैरोल दे दी है। कोर्ट के आदेशानुसार, अली और उमर को कड़ी पुलिस सुरक्षा में सीधे प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान ले जाया जाएगा, जहां वे परिवार के सदस्यों के साथ अंतिम क्रियाक्रम में शामिल होकर एक घंटे तक रुक सकेंगे। इसके बाद दोनों को तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा।
आबान की मौत एक सड़क हादसे में हुई। पूंछ थाना क्षेत्र के हाईवे पर जानवर को बचाने के चक्कर में उनकी तेज रफ्तार क्रेटा कार डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार 7 फीट हवा में उछल गई। इस हादसे में आबान की मौके पर ही मौत हो गई।
अली और आबान के बीच भाई-भाई का बेहद गहरा रिश्ता था। अली अपने छोटे भाई को जी-जान से चाहते थे। आबान हर महीने 3-4 बार झांसी जेल में अली से मिलने जाते थे। मुलाकात के दौरान दोनों भाई काफी देर तक एक-दूसरे से गले मिले रहते थे। आबान जब भी मिलने आता था, अपने भाई के पढ़ने के लिए नॉवेल और किताबें साथ लाता था।
इस घटना ने एक बार फिर से समाज के सामने सड़क सुरक्षा के महत्व को उजागर किया है। तेज रफ्तार और लापरवाही के कारण होने वाले हादसों से न केवल परिवारों को बल्कि पूरे समाज को गहरा सदमा पहुंचता है।
