‘100% प्योर’ का दावा: पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री का सबसे बड़ा भ्रम
जब आप सुपरमार्केट की अलमारियों से ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ लिखा हुआ पैकेट उठाते हैं, तो मन में विश्वास होता है कि उस उत्पाद में किसी भी प्रकार की मिलावट, रसायन या बाहरी हस्तक्षेप नहीं किया गया है. यह विश्वास इतना गहरा होता है कि लोग बिना सोचे-समझे ऐसे उत्पादों को खरीद लेते हैं. लेकिन क्या वाकई कोई पैकेज्ड फूड उत्पाद ‘100% शुद्ध’ हो सकता है? भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण () के हालिया फैसलों ने इस ‘100% वाले खेल’ का पर्दाफाश कर दिया है. ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ जैसे दावे अक्सर असत्यापित, अतिरंजित और ग्राहकों को भ्रमित करने वाले होते हैं. हाल ही में ने डाबर इंडिया लिमिटेड को ऐसे ही दावों वाले उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा संकेत है कि अब ‘100% प्योर’ जैसे दावों को बिना प्रमाण के नहीं किया जा सकता.
के अनुसार, ऐसे दावे (विज्ञापन और दावे) नियम, 2018 का सीधा उल्लंघन करते हैं. ये नियम खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों और लेबलिंग में किए जाने वाले दावों को नियंत्रित करते हैं. ने स्पष्ट किया है कि ‘100% प्योर’ जैसे शब्दों का प्रयोग केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जिनमें एक ही सामग्री हो और उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट या बाहरी पदार्थ न मिलाया गया हो. लेकिन व्यावसायिक पैकेज्ड फूड उत्पादों में ऐसा होना लगभग असंभव है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने, स्वाद बढ़ाने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है.
डाबर इंडिया के मामले में ने पाया कि कंपनी के उत्पाद ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक शहद’ पर ‘जैविक भारत’ लोगो का प्रयोग किया गया था, जबकि उनके पास वैध ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण नहीं था. इसके अलावा, ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ उत्पाद को ‘100% शुद्धता’ के दावे के साथ बेचा जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन था. ने डाबर इंडिया को निर्देश दिया है कि वह ऐसे उत्पादों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाए और 15 दिनों के भीतर अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करे.
इस पूरे मामले ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. अब सवाल उठता है कि क्या वाकई ‘100% प्योर’ जैसे दावे करने वाले उत्पादों पर भरोसा किया जा सकता है? क्या के नियम इतने सख्त हैं कि वे ग्राहकों को धोखे से बचा सकेंगे? आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं.
के नियम: ‘100% प्योर’ दावे की असलियत
के खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) विनियमन, 2018 के अनुसार, खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों और लेबलिंग में किए जाने वाले दावों को लेकर सख्त नियम हैं. इन नियमों का उद्देश्य ग्राहकों को भ्रमित होने से बचाना और उन्हें सही जानकारी प्रदान करना है. आइए, के इन नियमों को विस्तार से समझते हैं:
- ‘100% प्योर’ का दावा:के अनुसार, ‘100% प्योर’ का दावा केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जिनमें एक ही सामग्री हो और उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट, बाहरी पदार्थ या प्रक्रिया के दौरान कुछ भी जोड़ा या हटाया न गया हो. इसका मतलब है कि ऐसे उत्पादों को किसी भी प्रकार की प्रसंस्करण प्रक्रिया से नहीं गुजरना चाहिए. व्यावसायिक पैकेज्ड फूड उत्पादों में ऐसा होना लगभग असंभव है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने, स्वाद बढ़ाने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. उदाहरण के लिए, पैकेज्ड दूध, जूस, शहद, मसाले आदि को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उन्हें विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिससे वे ‘100% प्योर’ नहीं रह जाते.
- ‘100% नेचुरल’ का दावा:के अनुसार, ‘100% नेचुरल’ का दावा केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जो सीधे प्रकृति से प्राप्त होते हैं और जिनमें न्यूनतम प्रसंस्करण (जैसे धोना, काटना, सुखाना) हुआ हो. ऐसे उत्पादों में किसी भी प्रकार के रसायन, प्रिजर्वेटिव्स, कृत्रिम रंग या स्वाद का प्रयोग नहीं किया जा सकता. यदि किसी उत्पाद में दो या दो से अधिक सामग्रियां शामिल हैं, तो उस पर ‘100% नेचुरल’ का दावा करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. उदाहरण के लिए, पैकेज्ड फलों का रस, जिसमें एडेड शुगर, साइट्रिक एसिड या प्रिजर्वेटिव्स मिलाए गए हों, ‘100% नेचुरल’ नहीं हो सकता.
- ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा:के अनुसार, ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जो जैविक खेती के मानकों के अनुसार उत्पादित किए गए हों और जिनके पास वैध ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण हो. ऑर्गेनिक उत्पादों पर ‘जैविक भारत’ लोगो और उसका 14 अंकों का लाइसेंस नंबर होना अनिवार्य है. इसके अलावा, ऐसे उत्पादों में किसी भी प्रकार के रसायन, जीएमओ या कृत्रिम पदार्थों का प्रयोग नहीं किया जा सकता. यदि किसी उत्पाद पर ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा किया गया है, लेकिन उसके पास वैध प्रमाणीकरण नहीं है, तो यह के नियमों का उल्लंघन है.
- मिश्रित खाद्य पदार्थों (कंपाउंड फूड्स) पर ‘100% प्योर’ का दावा:के अनुसार, यदि किसी उत्पाद में दो या दो से अधिक सामग्रियां शामिल हैं, तो उस पर ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. इसका कारण यह है कि ऐसे उत्पादों में विभिन्न सामग्रियों के मिलाने से उनकी शुद्धता प्रभावित होती है. उदाहरण के लिए, पैकेज्ड नमक, जिसमें आयोडीन मिलाया गया हो, ‘100% प्योर’ नहीं हो सकता. इसी प्रकार, पैकेज्ड मसाले, जिसमें रंग या स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ मिलाए गए हों, ‘100% नेचुरल’ नहीं हो सकते.
के नियमों का उल्लंघन: डाबर इंडिया पर कार्रवाई का कारण
ने डाबर इंडिया लिमिटेड को ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया है. के अनुसार, डाबर इंडिया के उत्पाद ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’, ‘डाबर ऑर्गेनिक शहद’ और ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ पर किए गए दावे नियमों का उल्लंघन करते हैं. आइए, इन उत्पादों पर के आरोपों को विस्तार से समझते हैं:
- डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर:
- ने पाया कि इस उत्पाद पर ‘जैविक भारत’ लोगो का प्रयोग किया गया था, जबकि इसके पास वैध ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण नहीं था.
- उत्पाद पर ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा किया गया था, जो के नियमों का उल्लंघन था, क्योंकि उत्पाद में प्रसंस्करण प्रक्रिया शामिल थी.
- डाबर ऑर्गेनिक शहद:
- ने पाया कि इस उत्पाद पर ‘जैविक भारत’ लोगो का प्रयोग किया गया था, जबकि इसके पास वैध ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण नहीं था.
- उत्पाद पर ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा किया गया था, जो के नियमों का उल्लंघन था, क्योंकि शहद उत्पादन प्रक्रिया में विभिन्न चरण शामिल होते हैं.
- डाबर होममेड कोकोनट मिल्क:
- ने पाया कि इस उत्पाद पर ‘100% शुद्धता’ का दावा किया गया था, जबकि उत्पाद में प्रसंस्करण प्रक्रिया शामिल थी.
- उत्पाद में विभिन्न सामग्रियां शामिल थीं, जिससे ‘100% प्योर’ का दावा करना के नियमों का उल्लंघन था.
ने डाबर इंडिया को निर्देश दिया है कि वह ऐसे उत्पादों की बिक्री पर तुरंत रोक लगाए और 15 दिनों के भीतर अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करे. यदि कंपनी के निर्देशों का पालन नहीं करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
की बढ़ती सक्रियता: अन्य कंपनियों पर भी कार्रवाई
डाबर इंडिया के मामले के अलावा, ने हाल ही में कई अन्य कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों पर भी कार्रवाई की है. ने पाया है कि कई कंपनियां अपने उत्पादों पर ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे कर रही हैं, जो उनके उत्पादों की वास्तविक स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते. आइए, की इन कार्रवाइयों को विस्तार से समझते हैं:
- एनर्जी ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियां:
- ने , , , , , और जैसे छह एनर्जी ड्रिंक ब्रांड्स को गलत ब्रांडिंग और भ्रामक दावे करने के लिए नोटिस जारी किए हैं.
- ने पाया कि इन उत्पादों पर किए गए दावे उनके वास्तविक गुणवत्ता मानकों को प्रतिबिंबित नहीं करते.
- शराब बनाने वाली कंपनियां:
- ने कई शराब बनाने वाली कंपनियों को उनके उत्पादों पर किए गए दावों के लिए नोटिस जारी किए हैं.
- ने पाया कि इन उत्पादों पर किए गए दावे उनके वास्तविक गुणवत्ता मानकों को प्रतिबिंबित नहीं करते.
- क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म:
- ने स्विगी इंस्टामार्ट और जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को उनके प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए नोटिस जारी किए हैं.
- ने पाया कि इन प्लेटफॉर्मों पर बेचे जाने वाले कई उत्पाद एक्सपायर हो चुके, खराब या दूषित थे.
- ने इन प्लेटफॉर्मों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें और ग्राहकों को सुरक्षित उत्पाद प्रदान करें.
- अन्य खाद्य कंपनियां:
- ने और जैसी कंपनियों को उनके उत्पादों पर किए गए दावों के लिए नोटिस जारी किए हैं.
- ने पाया कि इन कंपनियों के उत्पादों पर किए गए दावे उनके वास्तविक गुणवत्ता मानकों को प्रतिबिंबित नहीं करते.
की इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि अब खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों और लेबलिंग में किए जाने वाले दावों को लेकर कोई लापरवाही नहीं बरती जा सकती. ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है.
नियमों का तुलनात्मक विश्लेषण: ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’
ग्राहकों के अधिकार: ‘100% प्योर’ जैसे दावों से कैसे बचें?
के नियमों के अनुसार, ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ या ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे करने वाले उत्पादों को लेकर ग्राहकों को सावधान रहने की आवश्यकता है. ऐसे उत्पादों पर भरोसा करने से पहले ग्राहकों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए:
1. उत्पाद के लेबल को ध्यान से पढ़ें
ग्राहकों को उत्पाद के लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए. लेबल पर दी गई सामग्री सूची में सामग्रियों को उनकी मात्रा के घटते क्रम में लिखा जाता है. यदि किसी उत्पाद पर ‘100% प्योर’ का दावा किया गया है, लेकिन उसकी सामग्री सूची में एडेड शुगर, साइट्रिक एसिड, प्रिजर्वेटिव्स या कृत्रिम रंग शामिल हैं, तो समझ जाएं कि दावा भ्रामक है. उदाहरण के लिए, यदि किसी ‘100% जूस’ में एडेड शुगर मिलाया गया है, तो वह ‘100% प्योर’ नहीं हो सकता.
2. लाइसेंस और प्रमाणीकरण की जांच करें
ग्राहकों को ऑर्गेनिक दावों वाले उत्पादों पर हमेशा ‘जैविक भारत’ लोगो और उसका 14 अंकों का लाइसेंस नंबर जरूर चेक करना चाहिए. यदि उत्पाद पर ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा किया गया है, लेकिन उसके पास वैध प्रमाणीकरण नहीं है, तो यह के नियमों का उल्लंघन है. ऐसे उत्पादों पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
3. उत्पाद के विज्ञापनों पर सवाल उठाएं
ग्राहकों को उत्पाद के विज्ञापनों पर सवाल उठाना चाहिए. विज्ञापनों में किए जाने वाले दावे अक्सर अतिरंजित और भ्रामक होते हैं. उदाहरण के लिए, यदि किसी उत्पाद पर ‘100% प्योर’ का दावा किया गया है, लेकिन उत्पाद में प्रसंस्करण प्रक्रिया शामिल है, तो दावा गलत है. ग्राहकों को ऐसे विज्ञापनों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और उत्पाद के लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए.
4. ग्राहक शिकायत दर्ज करें
यदि ग्राहकों को किसी उत्पाद के बारे में शंका हो, तो वे की वेबसाइट पर जाकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करता है और दोषी कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है. ग्राहक के टोल-फ्री नंबर 1800112100 पर कॉल करके भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
5. उत्पाद की गुणवत्ता की जांच करें
ग्राहकों को उत्पाद की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए. यदि उत्पाद में कोई असामान्य गंध, रंग या स्वाद है, तो उसे खरीदने से बचना चाहिए. इसके अलावा, ग्राहकों को उत्पाद के एक्सपायरी डेट की भी जांच करनी चाहिए. एक्सपायर हो चुके उत्पादों को खरीदने से बचना चाहिए.
के नियमों का उल्लंघन: कानूनी परिणाम
के नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. के अनुसार, दोषी कंपनियों को नोटिस जारी किया जाता है और उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाता है. यदि कंपनियां के निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना, उत्पादों की जब्ती और यहां तक कि कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला भी शामिल हो सकता है.
ने डाबर इंडिया को दिए गए आदेश में स्पष्ट किया है कि कंपनी को अपने उत्पादों की बिक्री पर रोक लगानी होगी और 15 दिनों के भीतर अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. यदि कंपनी के निर्देशों का पालन नहीं करती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
इसके अलावा, ने स्विगी इंस्टामार्ट और जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को भी उनके प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए नोटिस जारी किए हैं. ने इन प्लेटफॉर्मों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर बेचे जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें और ग्राहकों को सुरक्षित उत्पाद प्रदान करें. यदि प्लेटफॉर्म के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
के नियमों का प्रभाव: पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में बदलाव
के नियमों का प्रभाव पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. कई कंपनियां अपने उत्पादों पर किए जाने वाले दावों को बदल रही हैं और ग्राहकों को सही जानकारी प्रदान कर रही हैं. इसके अलावा, कई कंपनियां अपने उत्पादों के प्रमाणीकरण और गुणवत्ता मानकों को सुधार रही हैं, ताकि वे के नियमों का पालन कर सकें.
की सक्रियता के कारण पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में पारदर्शिता बढ़ी है. ग्राहकों को अब अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणीकरण के बारे में सही जानकारी मिल रही है. इससे ग्राहकों का विश्वास पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में बढ़ा है और वे सुरक्षित उत्पाद खरीदने में सक्षम हो रहे हैं.
इसके अलावा, की कार्रवाइयों के कारण कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. कंपनियां अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणीकरण में सुधार कर रही हैं, ताकि वे के नियमों का पालन कर सकें और ग्राहकों का विश्वास जीत सकें. इससे पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में गुणवत्ता मानकों में सुधार हुआ है.
| दावा | द्वारा अनुमति | द्वारा प्रतिबंधित | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 100% प्योर | केवल एकल-सामग्री वाले उत्पाद जिनमें कोई मिलावट या बाहरी पदार्थ न मिलाया गया हो और न ही हटाया गया हो | मिश्रित खाद्य पदार्थ, प्रसंस्कृत उत्पाद | शुद्ध नमक, शुद्ध शहद (यदि बिना किसी प्रसंस्करण के) |
| 100% नेचुरल | सीधे प्रकृति से प्राप्त उत्पाद जिनमें न्यूनतम प्रसंस्करण हुआ हो (धोना, काटना, सुखाना) | उत्पाद जिसमें रसायन, प्रिजर्वेटिव्स, कृत्रिम रंग या स्वाद मिलाया गया हो | ताजे फल, सब्जियां, बिना मिलावट वाला दूध |
| 100% ऑर्गेनिक | जैविक खेती के मानकों के अनुसार उत्पादित उत्पाद जिनके पास वैध ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण हो | उत्पाद जिसमें रसायन, जीएमओ या कृत्रिम पदार्थों का प्रयोग किया गया हो, बिना प्रमाणीकरण वाले उत्पाद | जैविक प्रमाणित फल, सब्जियां, अनाज |
| मिश्रित खाद्य पदार्थों पर ‘100%’ दावे | कभी नहीं | सभी मिश्रित खाद्य पदार्थ | पैकेज्ड जूस, पैकेज्ड नमक, पैकेज्ड मसाले |
के नियमों का प्रभाव: शेयर मार्केट पर असर
के नियमों का प्रभाव शेयर मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है. डाबर इंडिया के शेयरों में हाल ही में बड़ी गिरावट देखी गई है. बीएसई पर कंपनी के शेयरों में 4.30 फीसदी तक की गिरावट देखी गई. कंपनी का शेयर कारोबारी सत्र के दौरान 406.15 रुपए के साथ दिन के लोअर लेवल पर गया, जबकि दोपहर 2 बजकर 25 मिनट पर कंपनी का शेयर 4 फीसदी की गिरावट के साथ 407.15 रुपए पर कारोबार कर रहा था. वैसे कंपनी का शेयर मामूली गिरावट के साथ 421.45 रुपए पर ओपन हुआ था. उससे पहले सोमवार को कंपनी का शेयर 424.40 रुपए पर बंद हुआ था.
इस गिरावट के पीछे के नियमों का उल्लंघन और कंपनी पर लगाए गए प्रतिबंध मुख्य कारण हैं. निवेशकों ने कंपनी के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की है, जिससे शेयर की कीमत में गिरावट आई है. इससे स्पष्ट है कि के नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर निवेशकों का विश्वास कम हो रहा है.
के नियमों के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
1. क्या ‘100% प्योर’ लिखा होने पर उत्पाद वास्तव में शुद्ध होता है?
नहीं, के अनुसार, ‘100% प्योर’ का दावा केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जिनमें एक ही सामग्री हो और उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट या बाहरी पदार्थ न मिलाया गया हो. व्यावसायिक पैकेज्ड फूड उत्पादों में ऐसा होना लगभग असंभव है, क्योंकि उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने, स्वाद बढ़ाने और शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इसलिए, ‘100% प्योर’ लिखा होने पर भी उत्पाद वास्तव में शुद्ध नहीं हो सकता.
2. ‘100% नेचुरल’ का दावा करने वाले उत्पादों में क्या-क्या शामिल हो सकता है?
के अनुसार, ‘100% नेचुरल’ का दावा केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जो सीधे प्रकृति से प्राप्त होते हैं और जिनमें न्यूनतम प्रसंस्करण (जैसे धोना, काटना, सुखाना) हुआ हो. ऐसे उत्पादों में किसी भी प्रकार के रसायन, प्रिजर्वेटिव्स, कृत्रिम रंग या स्वाद का प्रयोग नहीं किया जा सकता. यदि किसी उत्पाद में दो या दो से अधिक सामग्रियां शामिल हैं, तो उस पर ‘100% नेचुरल’ का दावा करना पूरी तरह से प्रतिबंधित है.
3. ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा करने वाले उत्पादों के लिए क्या प्रमाणीकरण आवश्यक है?
के अनुसार, ‘100% ऑर्गेनिक’ का दावा केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जो जैविक खेती के मानकों के अनुसार उत्पादित किए गए हों और जिनके पास वैध ऑर्गेनिक प्रमाणीकरण हो. ऑर्गेनिक उत्पादों पर ‘जैविक भारत’ लोगो और उसका 14 अंकों का लाइसेंस नंबर होना अनिवार्य है. इसके अलावा, ऐसे उत्पादों में किसी भी प्रकार के रसायन, जीएमओ या कृत्रिम पदार्थों का प्रयोग नहीं किया जा सकता.
4. यदि किसी उत्पाद पर ‘100% प्योर’ का दावा किया गया है, लेकिन उसके लेबल पर एडेड शुगर लिखा है, तो क्या यह दावा सही है?
नहीं, यदि किसी उत्पाद पर ‘100% प्योर’ का दावा किया गया है, लेकिन उसके लेबल पर एडेड शुगर लिखा है, तो यह दावा गलत है. के नियमों के अनुसार, ‘100% प्योर’ का दावा केवल उन्हीं उत्पादों के लिए किया जा सकता है जिनमें एक ही सामग्री हो और उसमें किसी भी प्रकार की मिलावट या बाहरी पदार्थ न मिलाया गया हो. यदि उत्पाद में एडेड शुगर मिलाया गया है, तो वह ‘100% प्योर’ नहीं हो सकता.
5. के नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है?
के नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. के अनुसार, दोषी कंपनियों को नोटिस जारी किया जाता है और उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया जाता है. यदि कंपनियां के निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें जुर्माना, उत्पादों की जब्ती और यहां तक कि कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला भी शामिल हो सकता है.
निष्कर्ष
के नियमों ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों को लेकर के सख्त नियमों ने ग्राहकों को भ्रमित होने से बचाया है और उन्हें सही जानकारी प्रदान की है. डाबर इंडिया जैसे बड़े ब्रांडों पर की कार्रवाई ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है और कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणीकरण में सुधार करने के लिए मजबूर किया है.
ग्राहकों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए. उन्हें उत्पाद के लेबल को ध्यान से पढ़ना चाहिए, लाइसेंस और प्रमाणीकरण की जांच करनी चाहिए और ग्राहक शिकायत दर्ज करनी चाहिए. इससे न केवल उन्हें सुरक्षित उत्पाद मिलेंगे, बल्कि पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में गुणवत्ता मानकों में भी सुधार होगा.
की सक्रियता और सख्त नियमों के कारण पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में बदलाव आ रहा है. कंपनियां अब अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणीकरण में सुधार कर रही हैं, ताकि वे के नियमों का पालन कर सकें और ग्राहकों का विश्वास जीत सकें. इससे पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में गुणवत्ता मानकों में सुधार हुआ है और ग्राहकों को सुरक्षित उत्पाद मिल रहे हैं.
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि के नियमों ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में एक नई क्रांति ला दी है. ग्राहकों को अब अपने उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणीकरण के बारे में सही जानकारी मिल रही है, जिससे उनका विश्वास पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में बढ़ा है. के नियमों का पालन करने वाली कंपनियां न केवल ग्राहकों का विश्वास जीत रही हैं, बल्कि शेयर मार्केट में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रही हैं. इसलिए, पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री में गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए के नियमों का पालन करना अनिवार्य है.
